कुछ पुराने पन्ने किताब के
आज युही जो पलट गए
ताज़ी हुई यादों के बहाने जो मिल गए
छिपकर बैठे आंसू को
किनारे यों मिल गए ।
आज बीत गया यादों के संघ
अब कल की ओर नहीं भी कोई शर्म
बीत गए है वोह पल जिनसे था हमें डर।
कुछ पुराने पन्ने किताब के
आज युही जो गए पलट,
ताज़ी हुई यादे आज
मुस्कुरदिये अब फिर हम।
- पूजा श्रीवास्तव
dis poem is awesome mam .... :) rly ...keep it up ...love you ....:)
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